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स्वतंत्रता को सार्थक दिशाएं देनी होगी

स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। सबके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति के समान और सही अवसर...
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जीवन में पूर्णता लाते हैं गुरु

भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह अध्यात्म-जगत की सबसे बड़ी घटना के रूप में जाना जाता है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां की माटी एवं जनजीवन में गुरु को...
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प्रतिकूल परिस्थिति में संतुलन कैसे रहे?

हर व्यक्ति को जीवन में निराशा एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन सफल और सार्थक जीवन वही है जो सफलता और असफलता, अनुकूलता और प्रतिकूलता, दुख और सुख, हर्ष और विषाद के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपने चिंतन की धारा को सकारात्मक बनाए रखता है। जीवन की समग्र समस्याओं का...
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विश्व इतिहास का अनूठा महानायक

दुनिया में अनेक महापुरुषों की स्मृति को क्षीण होते हुए देखा है, लेकिन नेल्सन मंडेला इसके अपवाद है। उनके जीवित रहते समय जितना उनको सम्मान प्राप्त हुआ, उससे कहीं अधिक उनकी मृत्यु के बाद उन्हें समूची दुनिया ने आदर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रति जितनी उत्सुकता बढ़ी है, वह...
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गोल्डन गर्ल की गोल्डन जीत से महका भारत

देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है। विश्व को बौना बना सकता है। पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है। भारत की नई ‘उड़नपरी’ 18 वर्षीय असमिया एथलीट हिमा दास ने ऐसा ही करके दिखाया है, उसने अपनी...
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आओ एक नयी दुनिया बसाएं

आज का मनुष्य भूलभूलैया में फंसा हुआ है। यदि देखा जाये तो संसार का विस्तार यानी सुविधावादी और भौतिकवादी जीवनशैली एक प्रकार की भूलभूलैया ही है। भोग के रास्ते चारों ओर खुले हुए हैं। धन, सत्ता, यश और भोग – इन सबका जाल बिछा है और यह जान इतना मजबूत है कि एक बार आदमी...
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सऊदी में नारी अस्मिता की एक नयी सुबह का होना

रूढ़िवादी एवं जड़तावादी देश सऊदी अरब में उदारता और आधुनिकता लाने की शाहजादा मोहम्मद बिन सलमान की कोशिशों के तहत तीस वर्षों से चला आ रहा महिलाओं के वाहन चलाने पर लगे प्रतिबंध के कानून में ऐतिहासिक सुधार वहां के महिला समाज के लिये एक नयी सुबह का आगाज है। इस विषयक ताजा फैसले में...
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फिर कौन बचाएगा मानवाधिकारों को?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से निकलने का अमेरिकी फैसला पूरी दुनिया को चैंकाने वाला है क्योंकि इससे पूरी दुनिया में मानवाधिकारों से जुड़े प्रश्न और जटिल एवं असुरक्षित होंगे। एक बढ़ा प्रश्न है कि मानवाधिकारों को कौन बचायेगा? कौन रेखा खीचेगा दुनिया में बढ़ रही अमानवीय, बर्बर एवं हिंसक गतिविधियों और सामान्य नागरिक के...
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कानून से ज्यादा जरूरी है सोच का बदलना

बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण कानून यानी पॉक्सो में संशोधन संबंधी अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। अब बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान किया जा सकेगा। प्रश्न है कि अभी तक पाॅक्सो कानून ही पूरी तरह से सख्ती...
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मां जन्मदात्री ही नहीं, जीवन निर्मात्री भी

अन्तर्राष्ट्रीय मातृत्व दिवस सम्पूर्ण मातृ-शक्ति को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिवस है, जिसे मदर्स डे, मातृ दिवस या माताओं का दिन चाहे जिस नाम से पुकारें यह दिन सबके मन में विशेष स्थान लिये हुए है। पूरी जिंदगी भी समर्पित कर दी जाए तो मां के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है। संतान के...
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